शिक्षक स्थानांतरण में भेदभाव और वेतन लंबित: तेजस्वी ने CM को लिखा पत्र, 8 सूत्रीय मांग रखी

पटना// बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने राज्य में शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 10 अगस्त 2026 को लिखे पत्र संख्या 166 में उन्होंने उर्दू, अरबी और फारसी विषय के शिक्षकों के साथ कथित भेदभाव और नियमविरुद्ध व्यवहार का मुद्दा उठाया है।

तेजस्वी ने कहा कि इस मामले को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि कई विद्यालयों में जहां उर्दू, अरबी और फारसी का केवल एक ही शिक्षक है, उसे भी सरप्लस घोषित कर स्थानांतरण सूची में डाल दिया गया है। उनके अनुसार, “यदि किसी विषय का केवल एक शिक्षक उपलब्ध है, तो उसे सरप्लस मानकर हटाना उस विषय की पढ़ाई को समाप्त करने के समान है।”

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि पर्याप्त छात्र संख्या वाले स्कूलों में भी इन विषयों के स्वीकृत पदों को समाप्त या सरप्लस किया जा रहा है। इसके अलावा 5 वर्ष से कम सेवा वाले, संविदा और हाल में स्थानांतरित हुए शिक्षकों को भी सूची में शामिल करने की शिकायतें आई हैं। उन्होंने इसे “मात्र प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल” बताया।

मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों का 5-6 महीने से वेतन रुका
तेजस्वी ने अनुदानित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों का लगभग 5-6 महीने से वेतन लंबित होने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे कर्मियों के परिवारों की शिक्षा, चिकित्सा और दैनिक खर्च प्रभावित हो रहे हैं।

उर्दू-संकृत को समान महत्व देने की मांग
पत्र में उन्होंने कहा कि संस्कृत के साथ-साथ उर्दू भी भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत की भाषा है। सरकार से दोनों को समान शैक्षणिक महत्व देने और हर सरकारी स्कूल में इन विषयों के शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।

तेजस्वी की 8 सूत्रीय मांगें:

  1. उर्दू, अरबी और फारसी शिक्षकों की सरप्लस/स्थानांतरण सूची की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा हो।
  2. नियमविरुद्ध पाए गए सभी स्थानांतरण तत्काल रद्द किए जाएं।
  3. एकमात्र विषय शिक्षक को सरप्लस घोषित करने की प्रक्रिया रोकी जाए।
  4. उर्दू, अरबी, फारसी के स्वीकृत पद समाप्त न किए जाएं।
  5. 5 साल से कम सेवा, संविदा और हाल में स्थानांतरित शिक्षकों के मामलों की पुनः समीक्षा हो।
  6. हर सरकारी स्कूल में उर्दू और संस्कृत शिक्षकों की उपलब्धता के लिए स्पष्ट नीति बने।
  7. अनुदानित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों का लंबित वेतन तुरंत जारी हो।
  8. प्रक्रिया में हुई विसंगतियों पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दोषियों पर कार्रवाई हो।

तेजस्वी ने अंत में लिखा कि शिक्षकों के साथ अन्याय, छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों की उपेक्षा और महीनों तक वेतन रोकना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में समयबद्ध कार्रवाई कर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि किसी भी भाषा, विषय या शिक्षक के साथ भेदभाव न हो।

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