पटना, 7 जुलाई 2026 राष्ट्रीय खाद्य तेल–तिलहन मिशन के तहत बिहार में सूर्यमुखी की खेती के साथ मधुमक्खी पालन को जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इस एकीकृत मॉडल से ग्रामीण रोजगार बढ़ेंगे और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।

दोहरा फायदा वाला मॉडल
कृषि मंत्री ने बताया कि गर्मी में जब फूलों की कमी होती है, तब सूर्यमुखी मधुमक्खियों के लिए प्राकृतिक नेक्टर और पराग का बड़ा स्रोत बनती है। इससे मधुमक्खी कॉलोनियों का संरक्षण होता है और उच्च गुणवत्ता वाले शहद का उत्पादन बढ़ता है।
वहीं मधुमक्खियों द्वारा परागण से सूर्यमुखी में दानों का भराव बेहतर होता है। बीजों की गुणवत्ता सुधरती है और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है। यह मॉडल किसान और मधुमक्खी पालक दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।
उत्पादन से प्रसंस्करण तक फोकस
सरकार सिर्फ तिलहन उत्पादन तक सीमित नहीं है। कटाई के बाद प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर भी जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत तेल मिलों की स्थापना और आधुनिकीकरण के लिए सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर उपज बेचने की सुविधा मिलेगी, परिवहन लागत घटेगी और ग्रामीण इलाकों में नए रोजगार बनेंगे।
विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “Production to Processing की अवधारणा बिहार की कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाएगी। इससे प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।”
3 जिलों में शुरू, आगे होगा विस्तार
फिलहाल यह योजना बांका के धोरैया प्रखंड, शिवहर के पिपराही प्रखंड और सारण जिले में 25-25 एकड़ के क्लस्टर में चल रही है। इन मॉडलों के सकारात्मक परिणामों के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे सूर्यमुखी की खेती, मधुमक्खी पालन और मूल्य संवर्धन आधारित मॉडल अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में भागीदार बनें।
