पटना। 7 जुलाई 2026 बिहार को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से बड़ा सहयोग मांगा है। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और ऊर्जा सचिव-सह-बीएसपीएचसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक अजय यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी तथा MNRE सचिव संतोष कुमार सारंगी से मुलाकात कर राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक के प्रमुख प्रस्ताव
1. 3305 मेगावाट ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर + BESS
बिहार में सौर ऊर्जा परियोजनाओं से बनने वाली बिजली की सुगम निकासी के लिए 3305 मेगावाट क्षमता के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के विकास के लिए केंद्र से वित्तीय स्वीकृति मांगी गई। यह कॉरिडोर जमुई, बांका, लखीसराय, औरंगाबाद और कैमूर जैसे सौर ऊर्जा संभावित जिलों में स्थापित की जा रही परियोजनाओं को ग्रिड से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
2. पीएम सूर्य घर योजना का विस्तार
राज्य में 58 लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ता हैं। वर्तमान में सिर्फ 2.5 लाख उपभोक्ताओं को 1.1 किलोवाट रूफटॉप सोलर की स्वीकृति मिली है। राज्य सरकार ने पहले चरण में 10 लाख कुटीर ज्योति परिवारों को योजना से जोड़ने का प्रस्ताव MNRE को सौंपा और जल्द मंजूरी का आग्रह किया।
3. अन्य महत्वपूर्ण एजेंडा
- पीएम-कुसुम योजना फेज-II: 1000 कृषि फीडरों का सोलराइजेशन
- औरंगाबाद में 150 मेगावाट SECI सोलर पार्क
- बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति का प्रभावी क्रियान्वयन
- राज्य में NISE का क्षेत्रीय परिसर स्थापित करना
ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार ने कहा, “बिहार सरकार स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। केंद्र के सहयोग से हम राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार करेंगे।”
ऊर्जा सचिव अजय यादव ने कहा, “इन परियोजनाओं से बिहार की ऊर्जा संरचना मजबूत होगी। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा और किसानों व आम उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।”
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और MNRE सचिव श्री संतोष सारंगी ने बिहार के प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
बिहार सरकार को उम्मीद है कि केंद्र के सहयोग से राज्य में हरित ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति मिलेगी और 2047 तक ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य में बिहार की अहम भूमिका होगी।
