नोट्रे डेम एकेडमी पटना में गूंजा ज्ञान का मेला, छात्रों ने मॉडल्स से समझाया “अतीत और वर्तमान”

पटना: किताबों से आगे बढ़कर सीखने का जज्बा जब मंच पर उतरा तो पूरा स्कूल परिसर ज्ञान के रंगों से भर गया। नोट्रे डेम एकेडमी, पटना में 31 जुलाई 2026 को “अतीत को जानना, वर्तमान को समझना” थीम पर भव्य सोशल साइंस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कक्षा VI से VIII तक के छात्र-छात्राओं ने इंटर-हाउस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर रचनात्मकता और समझ का शानदार नमूना पेश किया।

मॉडल्स ने बताया विज्ञान और समाज का सच
प्रदर्शनी में चारों हाउस – रेड, येलो, ब्लू और ग्रीन – ने इतिहास, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अर्थशास्त्र, संस्कृति, पर्यावरण और सतत विकास जैसे विषयों पर काम किया। इस बार सबसे खास बात यह रही कि छात्रों ने सिर्फ पोस्टर और चार्ट नहीं बनाए, बल्कि लाइव वर्किंग मॉडल और इंटरैक्टिव डिस्प्ले तैयार किए।

जलवायु परिवर्तन का असर दिखाता वॉटर साइकिल मॉडल, सतत विकास के 17 लक्ष्यों पर आधारित प्रोजेक्ट, प्राचीन सभ्यताओं की झलक देता डायोरमा और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली समझाता लाइव सिमुलेशन – हर स्टॉल पर भीड़ लगी रही। आगंतुक और निर्णायक जब स्टॉल पर पहुंचे तो छात्रों ने आत्मविश्वास के साथ डेटा, कारण और समाधान तीनों को विस्तार से समझाया।

प्रतिस्पर्धा के बीच टीमवर्क की मिसाल
पूरे दिन स्कूल में रचनात्मकता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल रहा। हर हाउस के छात्रों ने हफ्तों की मेहनत एक दिन में दिखा दी। शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने शोध किया, सवाल पूछे और फिर अपने उत्तर को मॉडल के जरिए सबके सामने रखा। जजों ने विशेष रूप से छात्रों की आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान और प्रस्तुति कौशल की सराहना की।

प्रधानाचार्या: “यह किताब से आगे की शिक्षा है”
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्या सिस्टर मैरी नेहा ने कहा, “यह प्रदर्शनी सिर्फ एक आयोजन नहीं है। यह हमारी उस सोच का प्रमाण है कि शिक्षा अनुभव से पूरी होती है। हमारे बच्चों ने आज साबित किया कि वे सिर्फ रटते नहीं, समझते हैं और उसे रचनात्मक तरीके से दुनिया के सामने रख भी सकते हैं।”

उन्होंने सभी प्रतिभागियों, हाउस इंचार्ज और आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम स्कूल की परंपरा बनें ताकि हर बच्चा सीखने को उत्सव की तरह महसूस करे।

नोट्रे डेम की पहचान: प्रैक्टिकल लर्निंग
नोट्रे डेम एकेडमी पटना लंबे समय से पाठ्यपुस्तक के साथ प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर देता आया है। इस प्रदर्शनी को भी उसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जहां छात्रों ने ज्ञान को केवल याद नहीं किया, बल्कि उसे जिया और जताया।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी हाउसों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। अभिभावक और शिक्षक एक स्वर में बोले – आज स्कूल में सचमुच ज्ञान का मेला लगा था।

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