पटना, 29 जुलाई 2026 सीमांचल क्षेत्र में चाय की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। बिहार सरकार ने किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जिलों में ₹6.55 करोड़ की लागत से “चाय विकास योजना” को स्वीकृति दे दी है।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य सीमांचल में कृषि विविधीकरण को गति देना है। इससे किसानों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
सिन्हा ने कहा कि बिहार सरकार पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। सीमांचल की जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियां चाय की खेती के लिए बेहद अनुकूल हैं। सरकार इस क्षेत्र की प्राकृतिक क्षमता का पूरा उपयोग कर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस योजना से सीमांचल में चाय की खेती का विस्तार होगा, नए किसान इससे जुड़ेंगे और कृषि आधारित उद्यमिता के साथ स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और सीमांचल की पहचान देश के उभरते चाय उत्पादक क्षेत्र के रूप में मजबूत होगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और मूल्य संवर्धन को प्राथमिकता दे रही है। बिहार सरकार भी उसी सोच के साथ किसानों को नई और लाभकारी फसलों से जोड़ रही है। चाय विकास योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है जो सीमांचल के कृषि विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से किया जाए, ताकि पात्र किसानों को इसका लाभ जल्द मिल सके और योजना के सभी लक्ष्य प्रभावी रूप से हासिल किए जा सकें।
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